Super Admin · Aug 8, 2026
उदयपुर। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर माणिक्यलाल वर्मा श्रमजीवी महाविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से विस्तार व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित हुआ। विभागाध्यक्ष डॉ. एकता हुसैन ने अतिथियों का स्वागत उद्बोधन दिया। व्याख्यान के मुख्य वक्ता प्रोफेसर जी. एस. कूंपावत ने बताया कि विश्व आदिवासी दिवस यूएनओ द्वारा 1994 में सर्वप्रथम मनाया गया। दुनिया के अलग-अलग देशों के अलग-अलग क्षेत्रों में आदिवासी मौजूद हैं। इनकी परंपराएँ, रहन-सहन काफी अलग होने के साथ ही ये मुख्यधारा से काफी अलग हैं। इसलिए सरकार द्वारा भी आदिवासियों के उत्थान के लिए समय-समय पर कई योजनाएँ चलाई जाती हैं। जनजाति उप योजना क्षेत्र (टीएसपी), टाडा और माडा जैसी योजनाओं से जनजातियाँ लाभान्वित हो रही हैं। प्रोफेसर कूंपावत ने संविधान के अनुच्छेद और पाँचवीं अनुसूची में दिए गए संवैधानिक अधिकारों के बारे में भी चर्चा की।
आदिवासियों से सीखें एकजुटता :-
अधिष्ठाता प्रोफेसर मलय पानरी ने आदिवासियों की संस्कृति के बारे में बताया कि आदिवासी सिर्फ परिवार के बारे में ही नहीं बल्कि संपूर्ण समुदाय के हितों की रक्षा करते हैं और उनके हित सोचते हैं। हमको जनजातीय - आदिवासियों से सीखना चाहिए कि किस तरह से एकता को लेकर रहा जाता है। भूगोल विभाग के प्रो. डॉ. पंकज रावत ने जनजातियों की परिभाषा को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य के अनुसार अपने विचार व्यक्त किये और उक्त कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने भी भाग लिया। विभाग के डॉ. सी. एल. भगोरा ने आदिवासी समाज के ज्वलंत मुद्दों पर अपने विचार रखें और सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया और कार्यक्रम का संचालन हिमानी खारोल ने किया।
कार्यक्रम में डॉ. राजेश शर्मा, डॉ. ममता पानेरी , डॉ. कुसुम, डॉ. रानी प्रभा, डॉ. ममता पुर्बिया , डॉ. शैली, मेहता, डॉ. शाहिद हुसैन, डॉ. आरती, प्रीति यादव, डॉ. बिंदिया , शोधार्थी ज्योति डामोर के साथ कई छात्र उपस्थित थे।
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