Super Admin · Jul 14, 2026
उदयपुर, 14 जुलाई। राजस्थान सरकार द्वारा प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के संबंध में आम नागरिकों से सुझाव आमंत्रित किए जाने के बाद मंगलवार को मुस्लिम महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त महाधिवक्ता एवं यूसीसी प्रारूप समिति के सदस्य बसंत सिंह छाबड़ा को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर अपने सुझाव एवं मांगें प्रस्तुत कीं।
मुस्लिम महासंघ ने अपने ज्ञापन में कहा कि जब तक प्रस्तावित समान नागरिक संहिता का आधिकारिक मसौदा (ड्राफ्ट) सार्वजनिक नहीं किया जाता, तब तक जन-सुनवाई आयोजित करने का उद्देश्य स्पष्ट नहीं हो सकता। महासंघ ने मांग की कि सबसे पहले यूसीसी का ड्राफ्ट सार्वजनिक किया जाए, ताकि सभी नागरिक, सामाजिक संगठन एवं विभिन्न समुदाय उसके प्रावधानों का गहन अध्ययन कर तथ्यों एवं संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर अपने सार्थक सुझाव प्रस्तुत कर सकें।
महासंघ ने अपने ज्ञापन में यह भी कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक पहचान तथा अपने व्यक्तिगत कानूनों के पालन का अधिकार प्रदान करता है। मुस्लिम समुदाय अपने पारिवारिक एवं व्यक्तिगत मामलों का संचालन इस्लामी शरीयत एवं मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार करता है। इसलिए समान नागरिक संहिता के नाम पर मुस्लिम पर्सनल लॉ अथवा किसी भी धार्मिक अधिकार में ऐसा कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए, जिससे संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार एवं धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित हो।
मुस्लिम महासंघ ने यह भी कहा कि यदि राज्य सरकार वास्तव में सामाजिक न्याय एवं समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्ध है, तो उसे अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षिक, सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम उठाने चाहिए। महासंघ ने मुस्लिम समाज के सामाजिक एवं शैक्षणिक पिछड़ेपन को ध्यान में रखते हुए 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने की संभावनाओं पर गंभीरतापूर्वक विचार करने तथा इस संबंध में संवैधानिक एवं विधिक प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई करने की मांग भी की।
इस अवसर पर मुस्लिम महासंघ के संस्थापक अध्यक्ष हाजी मोहम्मद बख्श (प्यारा भाई), प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद हनीफ, राष्ट्रीय महासचिव एडवोकेट कमर रज़ा सिद्दीकी, पूर्व पार्षद हिदायतुल्लाह तथा संभागीय अध्यक्ष तौकीर रज़ा सहित महासंघ के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
Comments (0)
No comments yet. Be the first!