Super Admin · Jul 22, 2026
उदयपुर। उदयपुर शहर के सुखेर क्षेत्र स्थित चीरवा टनल में अचानक पहाड़ का हिस्सा ढहने और कई लोगों के मलबे में दबने की सूचना मिलते ही हड़कंप मच गया। सूचना पर एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF), सिविल डिफेंस, पुलिस, एनएचएआई (NHAI), चिकित्सा विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां तुरंत मौके पर पहुंच गईं। हालांकि, यह कोई वास्तविक हादसा नहीं था, बल्कि आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने के लिए आयोजित मॉक ड्रिल थी।
मॉक ड्रिल के दौरान टनल में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने, घायलों को प्राथमिक उपचार देने और एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाने का अभ्यास किया गया। सभी विभागों ने आपसी समन्वय के साथ तय समय में रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया।
सिविल डिफेंस के धनेंद्र कश्यप और गोविंद जगरवाल ने बताया कि इस तरह की मॉक ड्रिल का उद्देश्य विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करना है।
एनएचएआई के अमित जी ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों और टनलों पर सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस तरह के अभ्यास से आपात स्थिति में सभी विभागों की भूमिका स्पष्ट होती है और रिस्पॉन्स टाइम कम करने में मदद मिलती है।
एसडीआरएफ के महेंद्र सिंह ने बताया कि टनल में हादसे के दौरान सबसे पहले स्थिति का आकलन कर सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू शुरू किया जाता है। मॉक ड्रिल का उद्देश्य जवानों की तैयारी और विभिन्न एजेंसियों के समन्वय को मजबूत करना है।
एनडीआरएफ के रंजीत पटेल ने कहा कि किसी भी आपदा में शुरुआती "गोल्डन आवर" सबसे महत्वपूर्ण होता है। ऐसे अभ्यास से रेस्क्यू टीमों की कार्यक्षमता बढ़ती है और वास्तविक परिस्थितियों में लोगों की जान बचाने में मदद मिलती है।
प्रतापनगर थाना प्रभारी (SHO) अजयपाल सिंह ने बताया कि पुलिस की जिम्मेदारी मौके पर यातायात नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन और रेस्क्यू टीमों को निर्बाध कार्य करने के लिए सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना होती है। मॉक ड्रिल के दौरान इन सभी पहलुओं का सफलतापूर्वक अभ्यास किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के नियमित अभ्यास भविष्य में किसी भी आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य को अधिक प्रभावी बनाने और जनहानि को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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