भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति रोगों के निदान के लिए उचित: भैयाजी

भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति रोगों के निदान के लिए उचित: भैयाजी

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भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति रोगों के निदान के लिए उचित: भैयाजी

भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति रोगों के निदान के लिए उचित: भैयाजी

Super Admin · Jul 16, 2026

उदयपुर । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह व अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश जोशी उपाख्य भैयाजी ने कहा कि भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति रोगों के निदान पर कार्य करती है। इसे वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के बजाय समानान्तर पद्धति मानना चाहिए। यह विचार सुरेश जोशी उपाख्य भैयाजी ने सेवा भारती परिसर हरिदासजी की मगरी में आयोजित प्राकृतिक आरोग्य केंद्र के लोकार्पण समारोह में व्यक्त किये। समारोह में मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा थे। विशिष्ठ अतिथि पेसिफिक मेडिकल कॉलेज के अध्यक्ष राहुल अग्रवाल व धरोहर चेरिटेबल फाउंडेशन के निदेशक संजय सिंघल थे। भैयाजी ने कहा कि शरीर के स्वस्थ होने से अधिक जरुरी है मन का स्वस्थ होना। क्योंकि मन का प्रभाव शरीर पर पड़ता है। अस्वस्थ मन को ठीक करने के लिए ना तो किसी प्रकार की दवाई का नाम है और ना कोई चिकित्सा उसके लिए आवश्यक है । इसलिए भविष्य में शरीर के साथ साथ मन के स्वास्थ्य का भी विचार करे। ऐसी पद्धति के लिए हमे सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण विश्व के स्वास्थ्य का चिंतन केवल एक संस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) कर सके, यह असंभव है। हर देश हर समाज की परम्पराएं व मान्यतायें अलग है, खान-पान भिन्न है, जलवायू भिन्न है। परन्तु इन सभी के स्वास्थ्य का चिंतन केवल एक संगठन करे ,यह अवैज्ञानिक है। अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए क्लाइमेट जोन के अनुसार बड़ी मात्रा में ऐसे संगठन बनाये जाने चाहिए । भेयाजी ने कहा गीता प्रेस गोरखपुर की मासिक पत्रिका “कल्याण“ के एक लेख का संदर्भ देते हुए कहा कि भारत में चलने वाली 150 चिकित्सा पद्धतियों का वर्णन आया है। वर्तमान में एक महानगर में चिकित्सा पद्धतियों की जानकारी करने पर पता चला कि इतने बड़े महानगर में भी केवल 22 से 23 चिकित्सा पद्धतियां ही चलन में है। किसी चिकित्सा पद्धति में किसी रोग विशेष का उपचार नहीं है और किसी अन्य चिकित्सा पद्धति में किसी दुसरे रोग का उपचार नहीं मिल सकता, तो इस प्रकार अपूर्ण चिकित्सा पद्धतियां मिलकर पूर्ण होने का विचार करना चाहिए। इसलिए भारत में सब प्रकार की चिकित्सा पद्धतियों का स्वागत किया जाता है । उन्होंने कहा कि जिन्हे सुपर स्पेशलिटी चिकित्सालय के नाम से जानते है उसमे देश की केवल 10 प्रतिशत जनता ही लाभान्वित होती है। सामान्य व्यक्ति की पहुंच में नहीं है। स्वास्थ्य सेवा गुणात्मक के साथ साथ अफोर्डेबल भी हो। ऐसा विचार सभी निजी चिकित्सालयों ओर सेवा चिकित्सालयों को करना चाहिए। मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि योग शरीर व विचार को सकारात्मक बनाता है। मानव जीवन का उद्देश्य मानव का कल्याण है। सेवा भारती बिना प्रचार के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुंचाती है। समाज के बीच जाकर सेवा भाव से कार्य करती है। सेवा का अर्थ दुसरे के दु:खों को अपना दुःख मानना और जीवन को राष्ट्र के लिए उपयोगी बनाना है। नर सेवा ही नारायण सेवा है। आगे कहा कि सभी प्रतिदिन योग के लिए समय निकाले, तकनीकी का उपयोग करे और संस्कृति से भी जुड़े रहे । जब हम स्वास्थ्य के प्रति सजग होंगे, परिवार में संस्कार होंगे, जरुरतमंद की सेवा करेंगे और जाति से ऊपर उठकर विचार करेंगे तो हम भी राष्ट्र निर्माण के कार्य में सहयोग कर सकेंगे । प्राकृतिक आरोग्य केंद्र का लोकार्पण व सेवा भारती की वेबसाईट राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह व अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश जोशी (भैयाजी) ने किया। लोकार्पण समारोह के प्रारंभ में सेवा भारती के प्रान्त अध्यक्ष विवेक बोहरा ने सेवा भारती के कार्यो व प्राकृतिक आरोग्य केंद्र की जानकारी देते हुए कहा कि बदलती जीवनशैली, बढ़ते तनाव, प्रदूषण, अनियमित दिनचर्या तथा शारीरिक निष्क्रियता के कारण जीवनशैली संबंधी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्थापित प्राकृतिक आरोग्य केन्द्र में आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, योग, प्राणायाम, जल चिकित्सा, मिट्टी चिकित्सा, प्राकृतिक आहार परामर्श, मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, थायरॉयड, जोड़ों एवं हड्डियों की समस्याओं का प्राकृतिक प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के विशेष कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। केन्द्र पर स्टीम बाथ, कपिंग थेरेपी, एक्यूप्रेशर, एक्यूपंक्चर, चिकित्सकीय मालिश, स्पाइनल बाथ, सोना बाथ, शिरोधारा, कोलोन हाइड्रोथेरेपी, जूस थेरेपी, आधुनिक फिजियोथेरेपी के साथ आवश्यकता अनुसार एलोपैथी एवं दंत चिकित्सा की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। अनुभवी चिकित्सकों के मार्गदर्शन में व्यक्तिगत स्वास्थ्य एवं आहार परामर्श तथा योग आधारित जीवनशैली सुधार कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। सवीना स्थित बाल संस्कार केंद्र की बालिकाओं ने निर्मल पावन भावना सभी के सुख की कामना , गौरवमय समरस जीवन यही राष्ट्र की कामना गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम से पूर्व सेवा भारती की ओर से चलाये जा रहे सेवा कार्यो को प्रदर्शित करती हुई फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। लोकार्पण समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक निम्बाराम, क्षेत्र सेवा प्रमुख शिवलहरी, मूलचंद सोनी, सेवा भारती प्रान्त संगठन मंत्री गोविन्द कुमार, कार्यक्रम संयोजक प्रकाश सोनी, सह संयोजक राजेश सिंगोलिया सहित अन्य उपस्थित थे। संचालन जीवन मेघवाल व हंसा जोशी ने तथा धन्यवाद करुणा शर्मा ने ज्ञापित किया ।

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